मायके का रास्ता

कुछ रास्ते सिर्फ रास्ते नहीं होते पूरा एक सफर होते हैं जो कभी बहुत छोटे लगते हैं और कभी यही रास्ते मीलों लंबे हो जाते हैं।ऐसे ही रास्तों में एक रास्ता हम औरतों के लिए अपने मायके का रास्ता है जो कभी बहुत छोटा हो जाता है और कभी बहुत लंबा।हम औरतें चाहे कहीं की भी हों किसी भी काल की हों चाहे उच्च शिक्षित हों या बिल्कुल अनपढ़,चाहे आधुनिक शहरी हो या ठेठ देहाती अपने मायके के लिए हमारा ये स्नेह सबके दिल में एक जैसा है।मायके के आंगन की मिट्टी की महक हर औरत के ज़हन में सदा गीली ही रहती है मौत के साथ ही जाती है यह महक।मायके के रास्ते में आने वाले हर दरख्त की छाँव बिल्कुल माँ के आँचल जैसी लगती है।और यह पगडंडी टूटी-फूटी जैसी भी होती है इस पर चलते हुए हर कदम वो ही अहसास दिलाता है जैसे बचपन मैं माँ और पापा चलना सिखाते थे।गिरते पड़ते चलते थे हम लेकिन विश्वास होता था कि हाँ कोई है जो संभाल लेंगे।मायके के रास्ते का यह अहसास बहुत ही खुबसूरत और अद्बुत होता है, और सौभाग्य से यह सिर्फ हम औरतों के ही नसीब में है बेचारे पुरुष इससे कोसों दूर हैं………………

©️मूमल

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