गफ़लत

वो जो मुझसे मोहब्बत का दावा करता है वो भी क्या गज़ब गफ़लत करता है,

तकदीरों में जो लिखा ही नहीं वो नायाब नज़राना पेश करने की नाकाम कोशिशें करता है

मुकम्मल इश़्क

मेरी हर नज़्म मुकम्मल हो जाती है जब तेरी नज़रें इसे छू लेती हैं ,

मेरी हर इबादत मुकम्मल हो जाती है जब तेरा हर ख्वाब मेरी ख्वाइशों को छू लेता है।

©️मूमल

ताल्लुकात कम रखती हूँ आजकल ज़माने से

ताल्लुकात कम रखती हूँ आजकल आईने से

नज़्म जो लिख गया तू छिपाती फिरती हूँ ज़माने से

©️मूमल

ये जिस्म खाक हो जाएगा ये वक्त बदल जाएगा

इश़्क की किताबों के किस्से रह जाएंगे

लाइब्रेरी की दराजों में दर्ज हो जाएंगे

तुम देख लेना जाना इश़्क की खुशबू

महसूस होगी सुबहों शाम दरख्तों से

देख लेना हम मिलेंगें इस जहाँ के उस पार

जहाँ इश़्क रिश्तों रिवाज़ों का मोहताज नहीं।

©️मूमल

तुम्हारे जाने के बाद

जिस जगहां बैठ के जाते हो तुम मैं अक्सर उसी पर लेटी रहती हूँ घंटों,
तुम्हारे जाने के बाद मैं अक्सर उस गिलास को रखती हूँ संभाल के जिसमें पीते हो तुम पानी बार बार,
तुम्हारी बातों को याद करके मैं अकेले में मुस्कुराते रहती हूँ,
तुम्हारे जाने के बाद मैं अक्सर अपने घर को रहने देती हूँ वैसे ही,
तुम्हारे जाने के बाद मैं ना जाने कब तक बालकनी में खड़े उसी गली को ताकती रहती हूँ जिस गली से तुम आए थे,
तुम्हारे जाने के बाद मैं अक्सर उन सीढिय़ों पर चढ़ती उतरती रहती हूँ,

हाँ तुम्हारे जाने के बाद मैं अक्सर रखती हूँ खुद को तुम्हारे साथ सिर्फ तुम्हारे साथ।।

©️मूमल

रात

ये जो रात है ना काली रात,जो तारों से जगमगा रही है,
ये रात नहीं सिर्फ रात नहीं है,ये ओढ़नी है दुल्हन की,
नई नवेली दुल्हन की,नैहर वाली तारों वाली ओढ़नी,
जो उसे सबसे ज्यादा प्यारी है,जान से भी प्यारी है।
जिसे वो रखती है सहेज कर, निहारती है सन्दूक को खोलकर और ओढ़ती है बार-त्यौहार।
हाँ ये रात सिर्फ़ रात नहीं है,ओढ़नी है धरती की…..

©️मूमल

मायके का रास्ता

कुछ रास्ते सिर्फ रास्ते नहीं होते पूरा एक सफर होते हैं जो कभी बहुत छोटे लगते हैं और कभी यही रास्ते मीलों लंबे हो जाते हैं।ऐसे ही रास्तों में एक रास्ता हम औरतों के लिए अपने मायके का रास्ता है जो कभी बहुत छोटा हो जाता है और कभी बहुत लंबा।हम औरतें चाहे कहीं की भी हों किसी भी काल की हों चाहे उच्च शिक्षित हों या बिल्कुल अनपढ़,चाहे आधुनिक शहरी हो या ठेठ देहाती अपने मायके के लिए हमारा ये स्नेह सबके दिल में एक जैसा है।मायके के आंगन की मिट्टी की महक हर औरत के ज़हन में सदा गीली ही रहती है मौत के साथ ही जाती है यह महक।मायके के रास्ते में आने वाले हर दरख्त की छाँव बिल्कुल माँ के आँचल जैसी लगती है।और यह पगडंडी टूटी-फूटी जैसी भी होती है इस पर चलते हुए हर कदम वो ही अहसास दिलाता है जैसे बचपन मैं माँ और पापा चलना सिखाते थे।गिरते पड़ते चलते थे हम लेकिन विश्वास होता था कि हाँ कोई है जो संभाल लेंगे।मायके के रास्ते का यह अहसास बहुत ही खुबसूरत और अद्बुत होता है, और सौभाग्य से यह सिर्फ हम औरतों के ही नसीब में है बेचारे पुरुष इससे कोसों दूर हैं………………

©️मूमल

राम

‘‘जेहि दिन राम जनम श्रुति गावहिं।
तीरथ सकल जहां चलि आवहिं।।
भजु दीनबंधु दिनेश दानव, दैत्यवंश-निकन्दंन |
रघुनन्द आनंदकंद कौशलचन्द दशरथ-नन्दनं ||

राम के लिए जितना लिखा जाए कम ही पड़ेगा,राम सिर्फ एक व्यक्तित्व नहीं राम सिर्फ एक राजा नहीं राम सिर्फ एक मानव नहीं बल्कि राम स्वयं पूरा एक जीवन दर्शन हैं,सिद्धांत हैं,आदर्श हैं। जो लोग राम को सिर्फ ईश्वरीय अवतार के रूप में पूजते हैं उनको यह जानना आवश्यक है कि राम सिर्फ भगवान नहीं बल्कि वे स्वयं जीवंत मानव जीवन का आदर्श हैं।इसीलिए तो जब लक्ष्मण को शक्ति लगी तब राम बिलकुल हमारे और आपकी तरह छोटे भाई की वेदना में बिलखते हैं,सीता हरण के समय भी कुछ ऐसा ही दृष्टांत देखने को मिलता है कैसे राम सीते सीते पुकारते हुए बिलखते हैं जैसे किसी बालक की अतिप्रिय वस्तु किसी ने छीन ली हो अन्यथा क्या राम इतने सामर्थ्यवान नहीं थे क्या कि सीता को कुछ ही पलों में रावण के पाश से मुक्त करवा लाते वे तो स्वयं विष्णु जी के सातवें अवतार थे उनके लिए तो कुछ भी असंभव नहीं था।राम ने इसी वसुंधरा पर मानवीय अवतार में जन्म लेकर साधारण मनुष्य की भांति जीवन जिया।जब तक महलों में थे वे सिर्फ श्री राम थे फिर जब जंगलों में गए तो वे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम हो गए।राम की जीवन यात्रा में मानव समाज का हर पक्ष सम्मिलित है।समाज के सबसे निचले तबके दलित, आदिवासी, महिला सभी का अध्ययन राम के जीवन अध्ययन में सम्मिलित है।राम पर्यावरणविद् भी हैं और प्रबंधक भी।राम से अच्छा कोई लीडर नहीं हुआ आजतक और राम से बड़ा कोई राजा नहीं।दया,करूणा,प्रेम से ओत-प्रोत राम का ह्रदय आदर्श है मानव जाति के लिए।
जिस वंश में राम ने जन्म लिया था उसमें बहुपत्नी विवाह की परंपरा थी किंतु राम ने आजीवन एकपत्नी विवाह का ही पालन किया।राम यहाँ बताना चाहते हैं कि परंपराएं कितनी ही पुरानी या कठोर हों यदि सामाजिक जीवन के लिए अनुपयोगी हो उन्हें परिवर्तित किया जाना चाहिए इसी में समाज का विकास है।
रामायण में राम, सीता,हनुमान,लक्ष्मण,भरत,शत्रुघ्न,उर्मिला प्रत्येक चरित्र त्याग,तपस्या,कर्तव्यपरायणता और सत्य के लिए प्रतियोगिता करते हुए दिखते हैं इसलिए रामायण सिर्फ एक महाकाव्य नहीं बल्कि महादर्शन है और राम ईश्वरीय अवतार नहीं बल्कि जीवन दर्शन है।मानव जीवन की प्रत्येक समस्या का हल राम के दर्शन में है।
राम को किसी धर्म में बांधना सिर्फ मूढ़ता होगी,क्योंकि राम तो स्वयं सभी सभ्यताओं संस्कृतियों का सम्मान करते हैं उन्हें उनके वास्तविक रूप में स्वीकार करते हैं।
राम साधारण से असाधारण की ओर एक ऐसी यात्रा है जिसमें मानव जीवन के सभी उतार चढ़ाव हैं।
राम आदर्श हैं,महापुरुष हैं और राम दर्शन है जीवन का।

©️मूमल

बैचेनी

आजकल रातों को मैं सुकुन से सो नहीं पाती,
हवाओं में खौफ की महक घुल कर आती है।
हर रात इसी कशमकश में गुजर जाती है,
आने वाली सहर कैसी होगी ।

©️मूमल

खबर

कल परसों से खबरें आ रही है मेरे शहर से,
अमन चैन और सुकून छीन लिया है मेरे शहर से।
जाहिलों के गुनाहों की सजा मिलेगी मासूमों को भी,
तुम ये ना समझना सिर्फ मेरा घर जलेगा ये आग सबसे पहले तुम्हारे भी हाथ जलाएगी मेरे दोस्त।
क्योंकि जितना ये शहर मेरा है उतना ही तुम्हारा भी है मेरे दोस्त ।
इसलिए चुपचाप ना बैठो,अपने ईमां-ओ-धरम की गिरहें खोलो।